सही ITR फॉर्म कैसे चुनें (ITR-1 सहज से ITR-7): पात्रता मानदंड, आय के स्रोत और अनिवार्य फाइलिंग शर्तें
How to Choose the Correct ITR Form (ITR-1 to ITR-7): Filing Criteria, Income Thresholds, and Due Dates
आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय सही फॉर्म का चयन कानूनी रूप से अनिवार्य है, जो करदाता की श्रेणी, आय के स्रोत (वेतन, व्यापार, शेयर बाजार, विदेशी संपत्ति) और आय की सीमा पर निर्भर करता है। गलत फॉर्म भरने पर धारा 139(9) के तहत रिटर्न डिफेक्टिव (दोषपूर्ण) घोषित हो जाता है।
Choosing the correct Income Tax Return (ITR) form is legally mandatory based on the taxpayer entity type, residency status, quantum and source of income (salary, business, capital gains, foreign assets). Filing in an incorrect ITR form renders the return defective under Section 139(9).
प्रमुख बिंदु एवं पारिभाषिक शब्दावली
ITR-1 (सहज - Sahaj)
₹50 लाख तक कुल आय वाले निवासी वेतनभोगी, पेंशनभोगी और एक आवासीय संपत्ति से आय वाले व्यक्तियों के लिए सरल फॉर्म।
ITR-2 (पूंजीगत लाभ एवं अनिवासी)
वेतनभोगी या अन्य व्यक्ति जिनके पास शेयर/मकान बिक्री से कैपिटल गेन्स, एक से अधिक मकान या विदेशी संपत्ति/आय हो (व्यवसाय आय नहीं)।
ITR-3 (व्यापार एवं पेशेवर आय)
व्यवसाय या स्वतंत्र पेशे से लाभ कमाने वाले व्यक्तियों और HUF के लिए विस्तृत फॉर्म।
ITR-4 (सुगम - Sugam)
धारा 44AD, 44ADA या 44AE के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन चुनने वाले छोटे व्यापारियों व पेशेवरों के लिए।
1. ITR फॉर्म चयन का वैधानिक महत्व
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139(1) के तहत निर्धारित तिथि तक अपनी वास्तविक आय के अनुसार उपयुक्त फॉर्म में विवरणी दाखिल करना प्रत्येक करदाता का दायित्व है। यदि गलत फॉर्म का चयन किया जाए, तो आयकर विभाग से धारा 139(9) का डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस प्राप्त हो सकता है।
2. ITR-1 से ITR-7 तक संपूर्ण चयन मार्गदर्शिका
| फॉर्म नाम | पात्र करदाता | आय के स्रोत | प्रमुख अपात्रताएं |
|---|---|---|---|
| ITR-1 (सहज) | केवल निवासी भारतीय (Individual Resident) | वेतन, पेंशन, एक मकान संपत्ति, अन्य स्रोत (ब्याज) — कुल आय ₹50 लाख तक | • कंपनी में निदेशक<br>• अनलिस्टेड शेयर धारक<br>• कैपिटल गेन्स या व्यापार आय |
| ITR-2 | व्यक्ति एवं HUF (निवासी व अनिवासी) | वेतन, एक से अधिक मकान, पूंजीगत लाभ (Capital Gains), विदेशी आय/संपत्ति — ₹50 लाख से अधिक आय | • व्यवसाय या पेशे से कोई भी आय नहीं होनी चाहिए। |
| ITR-3 | व्यक्ति एवं HUF | व्यापार या पेशे से आय (Business / Professional Income), ऑडिट या गैर-ऑडिट केस, पार्टनरशिप फर्म में पार्टनर | — |
| ITR-4 (सुगम) | निवासी व्यक्ति, HUF, फर्म (LLP को छोड़कर) | धारा 44AD, 44ADA, 44AE के तहत प्रिजम्प्टिव आय — कुल आय ₹50 लाख तक | • कैपिटल गेन्स<br>• विदेशी संपत्ति<br>• एक से अधिक आवासीय संपत्ति |
| ITR-5 | LLP, AOP, BOI, फर्म, सहकारी समितियां | पार्टनरशिप फर्मों एवं संस्थाओं की समस्त आय | व्यक्ति, HUF या कंपनियां यह फॉर्म नहीं भर सकतीं। |
| ITR-6 | सभी पंजीकृत कंपनियां (Companies) | कंपनियों की समस्त व्यापारिक एवं गैर-व्यापारिक आय | धारा 11 के तहत छूट पाने वाली धर्मार्थ कंपनियां। |
| ITR-7 | ट्रस्ट, एनजीओ, धर्मार्थ संस्थाएं | धारा 139(4A), (4B), (4C), (4D) के तहत आने वाले ट्रस्ट एवं राजनीतिक दल | — |
3. अनिवार्य रिटर्न फाइलिंग के 7 विशेष नियम (7th Proviso to Section 139(1))
यदि किसी व्यक्ति की आय मूल छूट सीमा (₹2.5 लाख या ₹3 लाख) से कम भी हो, तब भी निम्नलिखित स्थितियों में ITR भरना कानूनी रूप से अनिवार्य है:
- चालू खाते (Current Account) में वर्ष भर में ₹1 करोड़ से अधिक जमा किया हो।
- एक या अधिक बचत खातों (Savings Accounts) में वर्ष भर में ₹50 लाख से अधिक नकद जमा किया हो।
- विदेश यात्रा पर ₹2 लाख से अधिक का व्यय किया हो।
- वर्ष भर में बिजली बिल पर ₹1 लाख से अधिक का भुगतान किया हो।
- व्यवसाय का वार्षिक टर्नओवर ₹60 लाख से अधिक या पेशेवर प्राप्तियां ₹10 लाख से अधिक हों।
- वित्तीय वर्ष में कटा कुल TDS/TCS ₹25,000 या अधिक (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000) हो।