Sat, 17 Oct, 2026
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Stock markets, RBI monetary policies, personal finance, banking, and fintech ecosystem.

हरित हाइड्रोजन और नवीकरणीय ग्रिड एकीकरण: भारत की ऊर्जा वित्तीय दिशा
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हरित हाइड्रोजन और नवीकरणीय ग्रिड एकीकरण: भारत की ऊर्जा वित्तीय दिशा

हरित हाइड्रोजन को नवीकरणीय ग्रिड से जोड़कर भारत ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के दोहरे लक्ष्य को साकार कर रहा है। इस परिवर्तन के लिए आवश्यक निवेश, नीति‑समर्थन और बाजार‑डायनामिक्स का विस्तृत विश्लेषण इस लेख में प्रस्तुत किया गया है।

भारत में ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ग्रिड एकीकरण: निवेश के नए आयाम
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भारत में ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ग्रिड एकीकरण: निवेश के नए आयाम

ग्रीन हाइड्रोजन को नवीकरणीय ऊर्जा के साथ जोड़कर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्य दोनों को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया है। इस पहल से वित्तीय बाजार में नई निवेश संभावनाएँ और उद्योग‑स्तर पर व्यापक बदलाव की उम्मीद है।

भारत में पूँजी लाभ कर: अल्पकालिक व दीर्घकालिक अंतर, छूट सीमा और सेक्शन 54/54EC राहत
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भारत में पूँजी लाभ कर: अल्पकालिक व दीर्घकालिक अंतर, छूट सीमा और सेक्शन 54/54EC राहत

पूँजी लाभ कर (CGT) के दो प्रमुख वर्ग – अल्पकालिक (STCG) और दीर्घकालिक (LTCG) – की दरें, छूट सीमा और सेक्शन 54/54EC की राहतों को समझना निवेशकों के कर नियोजन के लिए अनिवार्य है। यह लेख इन पहलुओं को स्पष्ट करता है और भारतीय इक्विटी एवं रियल एस्टेट बाजार पर उनके प्रभावों को उजागर करता है।

आयकर विवरणी (ITR) और टैक्स ऑडिट रिपोर्ट वित्तीय प्रपत्र एवं गणना
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सीबीडीटी ने टैक्स ऑडिट और ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाई: AY 2026-27 के लिए 21 नवंबर तक की मोहलत

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने करदाताओं और पेशेवरों को बड़ी राहत देते हुए असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तिथि 21 अक्टूबर और ऑडिट वाले मामलों में आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 नवंबर 2026 तक बढ़ा दी है।

डुअल जीएसटी ढांचा: अंतर-राज्य व अंतर-राज्यीय आपूर्ति में कर का नया समीकरण
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डुअल जीएसटी ढांचा: अंतर-राज्य व अंतर-राज्यीय आपूर्ति में कर का नया समीकरण

डुअल जीएसटी प्रणाली ने भारत में वस्तु एवं सेवा कर को दो स्तरों में विभाजित कर दिया है, जिससे अंतर-राज्यीय व अंतर-राज्यीय आपूर्ति में कर का प्रावधान स्पष्ट हुआ है। इस लेख में हम इस ढांचे के मुख्य तत्व, कार्यप्रणाली और व्यापारियों पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करेंगे।

जीएसटी बिलिंग, टैक्स रिटर्न और कंपोज़िशन समाधान योजना वित्तीय दस्तावेज
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जीएसटी कंपोज़िशन (समाधान) योजना 2026: छोटे व्यापारियों व MSME के लिए पात्रता, रियायती टैक्स दरें और संपूर्ण नियम

भारत सरकार की जीएसटी समाधान (कंपोज़िशन) योजना छोटे व्यापारियों, निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं को जटिल टैक्स रिटर्न के झंझट से मुक्ति और 1% जैसी न्यूनतम टैक्स दरों का सीधा लाभ प्रदान करती है। जानें इस योजना की पात्रता, नियम और फायदे।

रिजर्व बैंक ने थोक डिजिटल रुपये (CBDC) के पायलट का किया विस्तार, स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स से होगा इंटरबैंक सेटलमेंट
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रिजर्व बैंक ने थोक डिजिटल रुपये (CBDC) के पायलट का किया विस्तार, स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स से होगा इंटरबैंक सेटलमेंट

आरबीआई ने थोक डिजिटल रुपये (e₹-W) के पायलट को नए स्तर पर ले जाते हुए प्रोग्रामेबल स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स जोड़े हैं, जिससे सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी और कॉल-मनी मार्केट में तात्कालिक निपटान संभव हुआ है।

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EXPLAINER#पूँजी लाभ कर

भारत में पूँजी लाभ कर: अल्पकालिक व दीर्घकालिक अंतर, छूट सीमा: बुनियादी अवधारणा एवं व्याख्या

पूँजी लाभ कर (CGT) के दो प्रमुख वर्ग – अल्पकालिक (STCG) और दीर्घकालिक (LTCG) – की दरें, छूट सीमा और सेक्शन 54/54EC की राहतों को समझना निवेशकों के कर नियोजन के लिए अनिवार्य है। यह लेख इन पहलुओं को स्पष्ट करता है और भारतीय इक्विटी एवं रियल एस्टेट बाजार पर उनके प्रभावों को उजागर करता है।

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EXPLAINER#Income Tax

भारत में कैपिटल गेन्स टैक्स: शॉर्ट टर्म (STCG) बनाम लॉन्ग टर्म (LTCG) दरें, ₹1.25 लाख छूट सीमा और रियल एस्टेट नियम

कैपिटल गेन्स टैक्स पूंजीगत संपत्तियों (शेयर, म्यूचुअल फंड, रियल एस्टेट, सोना) की बिक्री से होने वाले मुनाफे पर लगता है। लिस्टेड शेयरों पर 1 वर्ष से अधिक होल्डिंग पर LTCG ₹1.25 लाख छूट के बाद 12.5% की दर से, और 1 वर्ष से कम पर STCG 20% की दर से लगता है। अचल संपत्ति पर LTCG की दर 12.5% निर्धारित है।

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GUIDE#Income Tax

सही ITR फॉर्म कैसे चुनें (ITR-1 सहज से ITR-7): पात्रता मानदंड, आय के स्रोत और अनिवार्य फाइलिंग शर्तें

आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय सही फॉर्म का चयन कानूनी रूप से अनिवार्य है, जो करदाता की श्रेणी, आय के स्रोत (वेतन, व्यापार, शेयर बाजार, विदेशी संपत्ति) और आय की सीमा पर निर्भर करता है। गलत फॉर्म भरने पर धारा 139(9) के तहत रिटर्न डिफेक्टिव (दोषपूर्ण) घोषित हो जाता है।

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COMPARISON#Income Tax

नया बनाम पुराना इनकम टैक्स रिजीम (धारा 115BAC): टैक्स स्लैब, ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन और रिबेट का संपूर्ण विश्लेषण

धारा 115BAC के तहत नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) 6 सरल स्लैब, ₹75,000 की बढ़ी हुई स्टैंडर्ड डिडक्शन और धारा 87A की रिबेट प्रदान करती है, जिससे वेतनभोगी कर्मचारियों की ₹7.75 लाख तक की वार्षिक आय पूरी तरह कर-मुक्त हो जाती है। इसके विपरीत पुरानी व्यवस्था में 80C, 80D और HRA जैसे कटौतियों का लाभ मिलता है।

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