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गगनयान मानवरहित अंतरिक्ष मिशन की तकनीकी संरचना

ANH समाचार ब्यूरो8 October 2026 at 12:00 am2 min read
गगनयान मानवरहित अंतरिक्ष मिशन की तकनीकी संरचना
गगनयान मानवरहित अंतरिक्ष मिशन की तकनीकी संरचनाPhoto Credit: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)

भारत ने गगनयान मानवरहित अंतरिक्ष मिशन के लिए एक व्यापक तकनीकी ढांचा तैयार किया है, जो अंतरिक्ष में मानवयुक्त उड़ान को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस लेख में मिशन की प्रमुख घटकों, तकनीकी चुनौतियों और संभावित प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

भारत ने अपने प्रथम मानवरहित अंतरिक्ष मिशन – गगनयान – के लिए एक जटिल और स्वदेशी तकनीकी संरचना विकसित की है, जो भविष्य में अंतरिक्ष में मानवयुक्त उड़ान को साकार करने की नींव रखेगी। इस मिशन में कई प्रमुख उपप्रणालियों का समन्वय आवश्यक है, जिसमें लॉन्च वाहन, सेवा मॉड्यूल, अभिकर्मक प्रणाली और पृथ्वी नियंत्रण केंद्र शामिल हैं।

मुख्य घटक और उनकी कार्यप्रणाली

लॉन्च वाहन (GSLV Mk III): गगनयान को भारत के सबसे शक्तिशाली लॉन्चर GSLV Mk III से प्रक्षेपित किया जाएगा, जिसकी पेलोड क्षमता लगभग 4 टन है। यह वाहन दो चरणीय रॉकेट इंजनों और एक ठोस मोटर बूस्टर से सुसज्जित है, जो 120 किमी की कक्षा तक पहुँचने के लिए आवश्यक थ्रस्ट प्रदान करता है।

सेवा मॉड्यूल (Service Module): यह मॉड्यूल प्रोपल्शन, पावर, थर्मल कंट्रोल और संचार के लिए जिम्मेदार है। इसमें 440 किलोग्राम हाइड्रोजन‑ऑक्सीजन टैंक, इलेक्ट्रिक पावर सिस्टम (400 kW) और हाई‑ग्लोबल‑स्पीड सैटेलाइट (HGSS) संचार एंटेना शामिल हैं, जो पृथ्वी नियंत्रण केंद्र के साथ निरंतर डेटा लिंक सुनिश्चित करता है।

अभिकर्मक प्रणाली (Crew Module): तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया यह मॉड्यूल जीवन समर्थन, पुनः प्रवेश शील्ड और आपातकालीन बचाव प्रणाली से लैस है। जीवन समर्थन प्रणाली में 24‑घंटे की ऑक्सीजन आपूर्ति, कार्बन डाइऑक्साइड हटाने के लिए ज़ीओलाइट फिल्टर और जल पुनर्चक्रण इकाई शामिल है, जिससे मिशन की अवधि 7 दिन तक बढ़ाई जा सकती है।

तकनीकी चुनौतियाँ और नवाचार

गगनयान ने कई तकनीकी बाधाओं को पार किया है, जैसे कि पुनः प्रवेश शील्ड की उच्च‑तापीय प्रतिरोधी सामग्री (Carbon‑Carbon कॉम्पोज़िट) का विकास, माइक्रोग्रैविटी में मानव शरीर के स्वास्थ्य पर प्रभाव का अध्ययन, और स्वायत्त नेविगेशन के लिए AI‑आधारित मार्ग नियोजन प्रणाली का एकीकरण। इसके अलावा, भारत ने अपने पहले क्वाड्रेटिक थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम को सफलतापूर्वक परीक्षण किया, जिससे पुनः प्रवेश के दौरान उत्पन्न अधिकतम 2 500 °C तापमान को सहन किया जा सके।

राष्ट्रीय एवं वैश्विक प्रभाव

गगनयान न केवल भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को सुदृढ़ करता है, बल्कि स्वदेशी तकनीक के निर्यात, उच्च‑स्तरीय कौशल विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर भी प्रदान करता है। इस मिशन से प्राप्त डेटा भविष्य में चंद्र और मंगल मिशनों के लिए महत्वपूर्ण आधारशिला बन सकता है, जिससे भारत की अंतरिक्ष रणनीति में एक नई दिशा स्थापित होगी।

Source Attribution:भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
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कहानी का संदर्भ और व्याख्या

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Tags:#गगनयान#अंतरिक्ष#ISRO#स्वदेशी तकनीक#वैज्ञानिक अनुसंधान
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