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हरित हाइड्रोजन और नवीकरणीय ग्रिड एकीकरण: भारत की स्वच्छ ऊर्जा रणनीति का नया मोड़

ANH समाचार ब्यूरो17 October 2026 at 12:15 am2 min read
हरित हाइड्रोजन और नवीकरणीय ग्रिड एकीकरण: भारत की स्वच्छ ऊर्जा रणनीति का नया मोड़
हरित हाइड्रोजन और नवीकरणीय ग्रिड एकीकरण: भारत की स्वच्छ ऊर्जा रणनीति का नया मोड़Photo Credit: न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मंत्रालय (MNRE)

भारत ने 2030 तक 10 GW हरित हाइड्रोजन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा का ग्रिड में सहज एकीकरण संभव हो सकेगा। यह पहल न केवल ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करेगी, बल्कि औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और पर्यावरणीय स्थिरता में भी नया आयाम जोड़ती है।

हरित हाइड्रोजन को भारत की शून्य‑कार्बन ऊर्जा मिश्रण का प्रमुख स्तंभ माना जा रहा है। सौर‑और पवन‑ऊर्जा से उत्पन्न इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा निर्मित हाइड्रोजन न केवल पेट्रो‑केमिकल उद्योग में कच्चे माल के रूप में काम आएगा, बल्कि परिवहन, स्टील और रिफाइनरी क्षेत्रों में भी स्वच्छ ईंधन के रूप में उपयोग होगा।

हरित हाइड्रोजन की तकनीकी प्रगति

भारत ने 2022 में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन रोडमैप जारी किया, जिसमें 2030 तक 10 GW क्षमता और 5 लाख टन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये का सार्वजनिक‑निजी साझेदारी (PPP) मॉडल अपनाया गया है। प्रमुख स्टार्ट‑अप और सार्वजनिक उद्यम अब बड़े‑पैमाने पर अल्ट्रा‑हाई‑वोल्टेज (UHV) ग्रिड के साथ इलेक्ट्रोलाइज़र को जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

नवीकरणीय ग्रिड में एकीकरण की चुनौतियाँ

हरित हाइड्रोजन को ग्रिड में जोड़ने के लिए दो प्रमुख तकनीकी बाधाएँ हैं: (1) ऊर्जा‑संग्रहण की लचीलापन, क्योंकि सौर‑और पवन‑ऊर्जा का उत्पादन असमान रहता है; (2) हाई‑डायनामिक रेटिंग वाले ट्रांसफॉर्मर और कंडक्टर्स की आवश्यकता, जो हाइड्रोजन‑आधारित पावर‑टू‑गैस (P2G) सिस्टम को संभाल सकें। इस संदर्भ में भारत ने 2024 में 500 MW पावर‑टू‑गैस पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया, जिसमें ग्रिड‑स्टेबिलिटी को मापने के लिए रीयल‑टाइम डेटा एनालिटिक्स प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया गया है।

आर्थिक एवं पर्यावरणीय लाभ

हरित हाइड्रोजन के बड़े‑पैमाने पर उत्पादन से औद्योगिक ईंधन की आयात‑निर्भरता घटेगी, जिससे विदेशी मुद्रा बचत होगी। साथ ही, हाइड्रोजन‑आधारित ईंधन सेल ट्रकों और फोर्सेज़ के उपयोग से परिवहन‑सेक्टर में CO₂ उत्सर्जन में 30 % तक की कमी की संभावना है। यह पहल भारत को वैश्विक हाइड्रोजन निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाते हुए, यूरोपीय और जापानी साझेदारियों को सुदृढ़ करेगी।

Source Attribution:न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मंत्रालय (MNRE)
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कहानी का संदर्भ और व्याख्या

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Tags:#हरित हाइड्रोजन#नवीकरणीय ऊर्जा#ग्रिड एकीकरण#ऊर्जा नीति#सस्टेनेबिलिटी
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