हरित हाइड्रोजन और नवीकरणीय ग्रिड एकीकरण: भारत की स्वच्छ ऊर्जा दिशा
हरित हाइड्रोजन को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से जोड़कर भारत की ग्रिड को कार्बन‑मुक्त बनाना अब नीति‑स्तर पर प्राथमिकता बन चुका है। इस लेख में तकनीकी आधार, आर्थिक लाभ और नियामक चुनौतियों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
हरित हाइड्रोजन को इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से सौर या पवन ऊर्जा से उत्पन्न बिजली से बनाया जाता है, जिससे उत्पादन प्रक्रिया में कोई कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलती। भारत ने 2030 तक 5 लाख टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्य दोनों को साकार किया जा सकेगा।
हरित हाइड्रोजन की तकनीकी आधार
इलेक्ट्रोलाइज़र की दक्षता अब 70 % से अधिक पहुँच गई है, जबकि लागत में 2022‑2025 के बीच 30 % की गिरावट अपेक्षित है। प्रमुख तकनीकी खिलाड़ी जैसे ‘Adani Green’ और ‘NTPC’ ने बड़े‑पैमाने पर ग्रिड‑कनेक्टेड सौर‑पवन फार्मों के साथ हाइड्रोजन प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई है। भारत में वर्तमान में 10 GW से अधिक नवीकरणीय क्षमता ग्रिड में जुड़ी हुई है, जो हाइड्रोजन उत्पादन के लिए स्थिर बेसलोड प्रदान करती है।
नवीकरणीय ग्रिड में एकीकरण की चुनौतियां
हाइड्रोजन उत्पादन की लचीलापन को ग्रिड की अस्थिरता के साथ समन्वयित करना आवश्यक है। सौर‑पवन उत्पादन में मौसमी उतार‑चढ़ाव के कारण इलेक्ट्रोलाइज़र को ‘डिमांड‑रेस्पॉन्स’ (DR) के रूप में उपयोग करना चाहिए, जिससे अतिरिक्त ऊर्जा को हाइड्रोजन में परिवर्तित किया जा सके। इसके अलावा, हाई‑वोल्टेज DC‑कनेक्शन, हाइड्रोजन स्टोरेज टैंक की सुरक्षा मानक, और ट्रांसमिशन लाइन में हाइड्रोजन‑मिश्रित गैस के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए नई नियामक ढाँचा आवश्यक है।
आर्थिक एवं पर्यावरणीय लाभ
हरित हाइड्रोजन न केवल भारी उद्योग (सीमेंट, इस्पात) के डिकार्बनाइज़ेशन में मदद करता है, बल्कि परिवहन (हाइड्रोजन‑फ्यूल‑सेल ट्रक, जहाज़) और ऊर्जा भंडारण में भी प्रमुख भूमिका निभा सकता है। यदि हरित हाइड्रोजन की कीमत ₹5 किलोवॉट‑घंटा से नीचे गिरती है, तो यह पेट्रोलियम‑आधारित ईंधन को प्रतिस्थापित कर 2035 तक अनुमानित 1.2 करोड़ टन CO₂ उत्सर्जन में कमी ला सकता है।
कहानी का संदर्भ और व्याख्या
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