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69000 शिक्षक भर्ती मामला: सुप्रीम कोर्ट में अब 17-18 नवंबर को होगी विस्तृत सुनवाई, आरक्षण व मेरिट रिविजन पर सबकी निगाहें

भारत का सर्वोच्च न्यायालय
संवैधानिक पीठ • विधि मंत्रालय

69000 शिक्षक भर्ती मामला: सुप्रीम कोर्ट में अब 17-18 नवंबर को होगी विस्तृत सुनवाई, आरक्षण व मेरिट रिविजन पर सबकी निगाहें

Official Policy & Regulatory Topic Verification

उत्तर प्रदेश की 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती मामले में आरक्षण नियमों, 6800 आरक्षित वर्ग सूची और हाईकोर्ट डबल बेंच के फैसले के खिलाफ दायर एसएलपी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली। अब 17-18 नवंबर 2026 को होगी निर्णायक बहस।

69,000 सहायक अध्यापक भर्ती: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की नई तिथि

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद की बहुचर्चित 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती मामले में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) में नियत सुनवाई स्थगित हो गई है। अब शीर्ष अदालत में इस जटिल विधिक विवाद पर 17-18 नवंबर 2026 को विस्तृत एवं अंतिम सुनवाई होने की संभावना है।

यह मामला आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमानुसार आरक्षण लाभ देने, ओवरलैपिंग नियमों के अनुपालन, बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा पूर्व में जारी 6800 अभ्यर्थियों की अतिरिक्त सूची को रद्द करने तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ (Double Bench) द्वारा पूरी चयन सूची को नए सिरे से पुनरीक्षित (Revise) करने के आदेश से संबंधित है।


1. मामले की पृष्ठभूमि एवं हाईकोर्ट डबल बेंच का फैसला

  • हाईकोर्ट डबल बेंच का निर्देश: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने अगस्त 2024 में दिए गए अपने ऐतिहासिक निर्णय में बेसिक शिक्षा परिषद को 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती की मूल चयन सूची को तीन माह के भीतर पुनरीक्षित करने का निर्देश दिया था।
  • 6800 सूची रद्द: कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 5 जनवरी 2022 को जारी 6800 आरक्षित वर्ग की अतिरिक्त चयन सूची को नियम विरुद्ध करार देते हुए निरस्त कर दिया था।
  • ओवरलैपिंग एवं आरक्षण नियम: अदालत ने व्यवस्था दी थी कि सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा (ATRE) केवल एक पात्रता परीक्षा नहीं बल्कि चयन का अभिन्न हिस्सा थी, अतः शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अथवा ATRE में आरक्षण का लाभ ले चुके आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी अनारक्षित (जनरल) श्रेणी में ओवरलैप नहीं कर सकते यदि उन्होंने न्यूनतम अर्हकारी अंकों में छूट प्राप्त की हो।

2. सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिकाएं (SLPs)

हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ चयनित सामान्य वर्ग, आरक्षित वर्ग और 6800 सूची के अभ्यर्थियों द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में अनेक विशेष अनुमति याचिकाएं (SLP) दाखिल की गईं:

  1. कार्यरत 69000 शिक्षकों की चिंता: वर्तमान में लगभग चार वर्षों से प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे हजारों शिक्षकों को अपनी सेवा सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता है कि यदि सूची पुनरीक्षित होती है तो बाहर होने की आशंका उत्पन्न हो सकती है।
  2. आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का पक्ष: आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का तर्क है कि मूल चयन सूची में विधिक आरक्षण नियमों (27% OBC एवं 21% SC) का घोर उल्लंघन हुआ और 19,000 से अधिक सीटों पर आरक्षण विसंगति हुई, जिसके कारण उन्हें उनका संवैधानिक अधिकार नहीं मिला।
  3. सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में हाईकोर्ट के चयन सूची पुनरीक्षण आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक (Interim Stay) लगाते हुए कार्यरत शिक्षकों की सेवाओं को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी।

3. आगामी 17-18 नवंबर 2026 की सुनवाई का महत्व

  • मुख्य न्यायाधीश / संबंधित पीठ द्वारा सभी पक्षों को अपने लिखित तर्क और डेटा संकलित करने का निर्देश दिया गया है।
  • बेसिक शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश की ओर से महाधिवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता पक्ष रखेंगे।
  • 17-18 नवंबर की विस्तृत सुनवाई में शीर्ष अदालत इस बात का अंतिम फैसला करेगी कि क्या 2020 की मूल चयन सूची यथावत रहेगी अथवा आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के समायोजन हेतु सरकार को कोई विशेष सुपरन्यूमरेरी पद (Supernumerary Posts) सृजित करने की अनुमति दी जाएगी।
Source Attribution:सर्वोच्च न्यायालय वाद सूची एवं बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश
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Tags:#69000 Shikshak Bharti#Supreme Court Hearing#Reservation Overlapping#Basic Shiksha Recruitment#6800 List Case
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